तालिबान कर रहा बदलने का दिखावा, सैनिक की पत्नी ने सुनाई रूह कंपा देने वाली दास्तां

नई दिल्ली. महज 14 साल में शादी हो गई और जब मां बनी तो दो बेटियों को तालिबानी पति ने बेच दिया. जी हां, यह कहानी है तालिबानी सैनिक की पत्नी फरीबा की जुबानी जो पिछले 26 साल से अपनी जिंदगी को संवारने के लिए दिन-ब-दिन कोशिश में लगी है. दिल्ली के भोगल में जिम ट्रेनर का काम कर रही तालिबानी सैनिक की पत्नी फरीबा ने कहा कि न तालिबान पहले कबूल था, न तालिबान अब कबूल है और ना तालिबान कभी कबूल होगा.
फरीबा ने कहा कि मेरी भारत सरकार से अपील है कि हमारी मदद करें. मैं 4 साल से यहां पर हूं लेकिन मुझे अभी तक रिफ्यूजी कार्ड भी नहीं मिला है. मैं एक मैं हूं और अपनी दो बेटियों की जिंदगी बचाना चाहती हूं दो बेटियों को खो चुकी हूं, लेकिन मेरे पास अब जो 2 बच्चे हैं. उनको पढ़ा लिखा कर मैं एक काबिल इंसान बनाना चाहती हूं. हमारी मदद की जाए, जिससे हम सुरक्षित तरीके से रह सकें और मेरी तरह और कोई लड़की फरीबा ना बने.

फरीबा ने बताया कि तालिबान चाहे कितना बोल ले कि वह बदल गया है, लेकिन मैंने तालिबान में रहकर जो जुल्म सहा है वह इसका प्रमाण है. तालिबानी कभी नहीं बदल सकता मेरे पति ने मेरे ससुराल वालों ने जिस तरीके से मुझ पर जुल्म सितम ढाए हैं. मेरी दो बेटियों को बेच दिया सिर्फ और सिर्फ तालिबान की वजह से. उन्होंने बताया कि 14 साल की उम्र में उनके माता-पिता ने शादी कर दी थी क्योंकि परिवार बेहद गरीब था और अफगानिस्तान में लड़की को इतनी इजाजत नहीं होती है कि वह अपने लिए लड़का पसंद करें. उसकी शादी अपनी उम्र से 20 साल बड़े लड़के से हो गई. शादी के बाद शुरू हुए उनके जुल्म की कहानी.

फरीबा ने बताया कि शादी के बाद जब वह मां बनी तो उनके चार बेटियां हुई. उसके पति ने अपनी आदतों को पूरा करने के लिए उसकी बड़ी बेटी को बेच दिया. उसने बताया कि मैंने अपने पति के सामने इतना रोया इतना गिर गया लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन जब मेरी दूसरी बेटी को बेचा तो मेरी बेटी ने खुदकुशी करने की कोशिश की और उसके बाद मेरी बेटी को मेरा पति ना जाने कहां छोड़ कर आया कि आज तक में अपनी बेटी का पता नहीं लगा पाई हूं. मैं तब समझ गई कि यह तालिबानी है और यह सिर्फ और सिर्फ तालिबान के इशारे पर काम करता है.

फरीबा ने बताया कि उन्होंने जब अपने माता-पिता को यह बात बताई. मेरे माता-पिता ने कहा कि अपनी दो बेटियों की जान बचाने के लिए तू यहां से चली जाओ और मुझे हिंदुस्तान पहले तेरी पसंद था. एक बार पहले भी मैं अपनी मां के साथ हिंदुस्तान आई थी और मैंने मन में ठान लिया कि मैं हिंदुस्तान में जाकर रहूंगी, क्योंकि जिस तरीके से हिंदुस्तान में अंग्रेजों को भगाया था महिलाओं की यहां पर इज्जत की जाती है. इसीलिए मैं अपने दोस्तों की मदद से भारत पहुंची और पिछले 4 साल से दिल्ली में रह रही हूं.
