मोदी सरकार के इस मंत्री ने उड़ा दी पाकिस्तान की नींद, अब पीओके की बारी

370 कमज़ोर करने के बाद अब भारत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर नज़र जमाए है। केंद्र सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिनों की सबसे बड़ी उपलब्धि में जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने को गिनवाते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह (Jitendra Singh) ने कहा है कि अब भारत का अगला एजेंडा पीओके(Pakistan Occupied Kashmir) को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

कश्मीर(Kashmir) मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री जीतेन्द्र सिंह ने मोदी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाने के बाद अखंड भारत के सपने को साकार करने के लिए भारत की नज़र पीओके(PoK) पर होगी। इसके साथ ही उन्होंने देश विरोधी काम करने वाले लोगों और ताकतों को चेतावनी देते हुए कहा कि,’यह मानसिकता है कि आप कुछ भी करके बच निकलेंगे। अब आप बच कर निकल नहीं पाएंगे, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए आपको कीमत चुकानी होगी।’ कश्मीर में स्थिति उनका कहना है कि कश्मीर में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। “हमें, कश्मीर कर्फ्यू के साए में है और पूरी तरह से बंद है, जैसे बयानों की निंदा करने की जरूरत है। कश्मीर बंद नहीं है। वहां कर्फ्यू नहीं है। अगर कर्फ्यू होता तो लोगों को बाहर निकलने के लिए ‘कर्फ्यू पास’ की जरूरत होती।” उन्होंने कहा वहां सिर्फ कुछ पाबंदियां लगी हुई हैं। इंटरनेट सेवा के बारे में सिंह ने कहा कि,’हम इंटरनेट सेवा को जल्द से जल्द बहाल करना चाहते हैं। इसके लिए प्रयोग के तौर एक कोशिश की गई थी लेकिन सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो डाले गए, इसलिए फैसले की फिर से समीक्षा करनी पड़ी।’ जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार इन पाबंदियों को खत्म करने और इंटरनेट पर रोक हटाने को इच्छुक है।

एक स्वीकार्य रुख- पीओके

वहीँ पाकिस्तान(Pakistan) अधिकृत कश्मीर को लेकर जीतेन्द्र सिंह ने कहा कि ‘यह केवल मेरी या मेरी पार्टी की प्रतिबद्धता नहीं है बल्कि यह 1994 में पीवी नरसिंह राव के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा संसद से सर्वसम्मति से पारित कराया गया संकल्प है। यह एक स्वीकार्य रुख है।’ इसपर कांग्रेस पर भी व्यंग्य करते हुए उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर को लेकर देशों के नज़रिए की बात कही। पाकिस्तान की ओर से हो रहे दुष्प्रचार अभियान पर उन्होंने दावा किया कि पूरी दुनिया का रुख भारत के अनुकूल है। उन्होंने दावा किया कि जो देश इस मुद्दे पर भारत के रुख से सहमत नहीं थे, अब वे भी हमारे रुख से सहमत हैं। उन्होंने कश्मीर का एक सकारात्मक भविष्य होने का आश्वासन दिया।

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